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Home भोजपुरी साहित्य कन्हैया प्रसाद तिवारी रसिक जी के लिखल एगो पुर्वी

कन्हैया प्रसाद तिवारी रसिक जी के लिखल एगो पुर्वी

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कन्हैया प्रसाद तिवारी रसिक जी
कन्हैया प्रसाद तिवारी रसिक जी

जीया तड़पावे जियते मरले बा भाला
हला सुनत नइखे
छीन लेला आगे से नेवाला
हाला सुनत नइखे ।।

बोलत रहे तूती जब रहीं हम जवान हो
कान्ही पो लंगोटा हाथे लाठी पहचान हो
डांठ पियराइल लागल पुरवा के पाला
हाला सुनत नइखे
छीन लेला आगे से नेवाला
हाला सुनत नइखे ।। 1।।

गतरी गतरी पड़े गते गते ठंडा
पंजरा ना आवे केहु ओझा गुनी पंडा
ओझा गुनी पंडा
आइला खबरिया लेके डकिया हवाला
हला सुनत नइखे
छीन लेला आगे से नेवाला
हाला सुनत नइखे ।। 2 ।।

सेर से छटांक भइल रसिक के अटरिया
आपन जे कहात रहे लेले बा कगरिया
लेले बा कगरिया
रूह छटपटाता बाकि खुले नाहीं गाला
हाला सुनत नइखे
छूटल जाता मिरिची मसाला
हला सुनत नइखे
छीन लेला आगे से नेवाला
हाला सुनत नइखे।। 3 ।।

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