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शारदानन्द प्रसाद जी के लिखल भोजपुरी आत्म संस्मरण सुरता के पथार

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शारदानन्द प्रसाद जी के लिखल भोजपुरी आत्म संस्मरण सुरता के पथार

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प , रउवा सब के सामने बा शारदानन्द प्रसाद जी के लिखल भोजपुरी किताब सुरता के पथार , जवन की एगो भोजपुरी में लिखाइल आत्म संस्मरण ह। एह किताब के डाउनलोड करि आ पढ़ीं, आपन राय जरूर दीं कि रउवा इ भोजपुरी किताब कइसन लागल आ रउवा सब से निहोरा बा कि एह कहानी के शेयर जरूर करी।

संस्मरण आपन होखे भा गैर के, मन अतीत के गहराई में अइसन उतर जला की उहाँ से टकसे के नाँव ना लेला। सुरता के पथार आम आदमी के संस्मरण ह , जे फूल मतिन बने में फुलाइल आ बने में झर गइल। कवनो दुराव- छिपाव न जानल। माटी से जुड़ल रहल।

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तब के जमाना में लोग आज के आदमी लखां संवेदना शून्य न रहे। संवेदना-शून्यता के चलते आज-काल्ह जान गाजर-मुरई हो गइल बा। जिनगी भाजी लेखां उसीना रहल बा। सुरता के पथार में पचहत्तर-छिहत्तर बरिसे पहिले के समाज, आदमी रीती-रिवाज, मूल्य, संघर्ष के ढंग, सहजोग, विचार, भाव, संवेदना कइसन रहल बा- पढ़े के मिली।

शारदानन्द प्रसाद जी के लिखल भोजपुरी आत्म संस्मरण सुरता के पथार
शारदानन्द प्रसाद जी के लिखल भोजपुरी आत्म संस्मरण सुरता के पथार

नशाखोर, घूसखोरी, डैकेती, अपहरन, हत्या, बलात्कार आ आतंकवाद से आज के आदमी जूझ रहल बा। केहू सुनवईया नइखे-
“जइसन सुनत रहनी देखनी नजरिया
कलजुग के बेवहरिया ननदी। ”

ऊपर से सेक्स आहिंसा के सीरियल आ फिलिम नइकी पीढ़ी के आउर बरबाद कर रहल बा।

संस्मरण के बहुत से पात्र एह दुनिया से गुजर गइल बाड़े। जे जिन्दा होखे, बुरा मत मानो, ई हमार निहोरा बा। हमार मनसा ई दरसावे के रहे की ओह जुग-जमाना के लोग कइसन होत रहे। हमार उद्देश्य ओह लोगन के कवनो हँसी उड़ावे के नइखे रहल।

आखिर में हम इहे कहब की पाठक लोगन का ‘सुरता के पथार’ पढ़ला से कछऊ हम ढेर मानब ।

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ध्यान दीं : इ किताब भोजपुरी साहित्यांगन से डाउनलोड कइल गइल बा

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