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शैलेन्द्र कुमार साधु लिखल जी के लिखल दू गो रचना

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शैलेन्द्र कुमार साधु जी
शैलेन्द्र कुमार साधु जी

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रिहता रहे भाई के

बाडा आशा करिके रक्षा बन्हलु,
रिहता रहे भाई के,
भरम तुर देलख,दुसकरम् कर जलाई के।

कही दहेज के बलि चढलु,कही राही के रोडा हो,
कडी मेहनतसे दिन-राती एककरेलु,
तबहु दुशासनके ओरा हो।

कईसन दिन ह, रात होता काली
जड-जड के मरतिया,कोखी के लाली।

फेकी द कलम, छोर द उ भरम्,
उठाव हथियार,तलवार भांजअ हरदम।

कईसन जुग बा,कवन ह सरकार,
कुकरमी राज करता,बबुनीपर होता अत्याचार ।

बह गईल इजत ,मरयादा पानी-पानी,
चुपी तुरअ बबुनी,बन जा झांसीके रानी।

आँखीसे देखल करऽ,
मारल गईल दामिनी,निर्भया आ प्रियंका के,
पापियनके नाश कर दऽ, जल्दी जलादऽ लंका के।

चिन्हल करऽएकनीके,
भीतरे गाद बच्छमुह बा,
देखल करऽ सडकसे भवन ले बरका समुह बा।

कहलजाला ईदेश ह चिडिया सोनाके,
रहल मसकिल बा,नारी के कोना-कोना के।
उजरे पेन्ह घूमीके,कहे अपनेके ह धरमी,
आज हम जननी,ईहे रहे कुकरमी।

दुनिया मे बडका कानुन बा अपना देशमे,
तब काहे कुकरमी मिलतारे,
अलगे भेष मे।
ई देखी के “साधुजी”अईले,
होत गलती मे सभे के समझईले।

शैलेन्द्र कुमार साधु

पिआजवा

गजब रेऽपिआजवा, कमाल कईले बा ,
निमनको के जिअल, दुसवार कईले बा।
केहु रहे नुने -दुलम,
केहु मिठाई-मेवा चाभेला,
गरीबबवा के, गरिआवते चले जईसे,
अपना के खुबे, दबंगदेवा लागेला।
तोर भोटवा केनीतिआ,धमाल कईले बा,
गजब रे ऽ………………

बात करि पिआजवा के,बहाना खोज अलगे!
जाति-धरमवामे लडाकेआपन,
खुबे पहचान बनईले बा।
गजब रेऽ……………….

बाह रे पिआजवा, रूपवा अनार धईले बा!
निमनको के जिअल,दुसवार कईले बा।
डरे-सहमके,निकलस बबुनी,
रूप बदलके!
माई-बहिनिया के रिहता शरमसार कईले बा।
गजब रेऽ……………..

बात केहु के,रखे ना देवे!
हर बतिया पर बोलल,बंसाल कईले बा।
नवका बबुआसे पकौड़ा बेचवावे,
कही चोरी मे बबुआ,
जिनगी बेकार कईले बा।
गजब रेऽ………….

फिरी मे जिओ बाटी के,
पुरा नाम कईले बा!
बबुआ के जीवन , कंगाल कईले बा।
आलु -पिआज के, बात छोरी के !
सब गरीबन असुआ के,लाल कईले बा।
बादशाहत मे, ई अमर बावे!
“साधुजी”जस लईकनके,
जिअल हराम कईले बा
गजब रे?पिआजवा, कमाल कईले बा!

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