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अभियंता सौरभ भोजपुरीया जी के लिखल भोजपुरी कहानी उ का रहे

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अभियंता सौरभ भोजपुरिया जी

तहरा का हासील भईल उ हम नइखी जानत आ जाने के भी नइखी चाहत । बाकिर अतना जरूर कहेम की तू आपन जिन्दगी के अनमोल नगीना के खो देहलु जे तहरा के आपन जान से बढ़ के प्यार दुलार करत रहे आ शायेद आज भी करेला।

छोडा जायेदा तहरा जवन बुझाईल उ कैइलू …. खैर कवनो बात ना ….. बाकिर तोहके हमार प्यार के कसम बा अब हमरा जिनगी में कबो दुबारा आवे के कोशिश मत करी ह .. अब हम सहन ना कर पायेम …अगर ज़िन्दगी में कबो हम सामने मील भी गईली ता मुँह मोड़ लिहा … काहे की अगर हम तोहके देखेम ता तोहार बेवफाई याद आई आ शायेद हम आपन गुस्सा के संभाल ना पायेम ।

एक दिन अचानक मोहन के पुरान आपन स्कूल के डायरी मील गईल आ राधीका के दूर गईला के बाद राधीका के बेवफाई के बात लिखल मोहन के याद आवे लागल ।

अभियंता सौरभ भोजपुरिया जी
अभियंता सौरभ भोजपुरिया जी

बात तब के ह जब मोहन 14 सावन देख चुकल रहले आ उमिर के उ पड़ाव पर रहले की विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होखे के उमीद ज्यादा रहे । एक दिन आपन रिस्तेदारी में मोहन के गर्मी के छुटी में गइले । सब ठीक ठाक रहे अचानाक से एगो चंचल खूबसूरत लड़की पर नजर पड़ल । आ अईसन पड़ल की नजर हटे के नाव ना लेव । उ चंचल लईकी राधिका रहली । हम उमिर भईला के नाते दुनो एक साथ खेले लागल लोग साथ बीते लागल । आ मोहन हर गर्मी के छुटी में राधिका से मिले खतीर चल जास । इ मेल जोल कब एगो दोस्ती आ कब प्यार एक दूसरा के ज़िन्दगी बन गईल मालूम ना चलल। दुनो अपना के प्रेम के बंधन में बाध देहल लोग । जिये मरे के कसम खाये लागल लोग ।
एक दूसरा के देखल घंटो बात कइल हँसल हँसा वल अच्छा लागे लागल । बहुँत खूब सूरत जोड़ी लगे दुनो के बाकिर इ दुनो जोड़ी के केहु के बुरा नजर लाग गईल। राधीका आ मोहन के मेल जोल पर घर वाला सब रोक लगावे लागले ।

जब मोहन के मालूम भईल की उनकर प्रेम के बारे में सबकरा मालूम हो गईल बा …आ उनकरा घर आइला पर भी रोक लाग गईल बा …ता बहुत दुखी भइले। धीरे धीरे समय बीते लागल चोरी छिपे मिलत आ बात करत करत । मोहन उच्च शिक्षा खतीर शहर चलल गइले । आ एने राधिका के माई बाबु उनकर शादी खतीर लईका खोजे लागल लोग । कुछ महीना बाद मोहन आके आपन राधिका के हाथ आ साथ मांगले बाकिर लाख कोशिर कइला के बाद भी राधिका के घर वाला राजी ना भईल सब । मोहन फेर राधिका से मिल के पढ़े चल गइले । बिच बिच में कबो बात हो जाओ । मोहन के पढाई पूरा हो गईल । मोहन फेर एक बेर राधिका से मिले खतीर सब बंधन तूड़ के गइले बाकिर उनकरा बात पर राधिका के घर वाला राजी ना भईल लोग । राधिका मोहन के उ आखीरी मुलाकात रहे राधिका आपन प्यार के कसम दे देहली की आज के बाद हमरा से जन मिली हा आ हमरा के हो सके ता भूल जईहा काहे की हम माई बाबु के खिलाफ जा के शादी नइखी कर सकत । मोहन आँशु भरल आँख लिहले वापिस आ गईले । सारा सपना टूट गईल रहे मोहन बहुत मुश्किल से आपन के सँभाल पॉवले ।

नॉकरी करे लागले आ एक बेर फेर राधिका के तलाश में उनकर रिस्ते दार से निवेदन विनती कइले । बाकिर निराशा हाथ लागल । राधिका भी बात कइल बंद कर देहली ।
कुछ दिन के बाद मोहन घर आइले ता मालूम चलल की राधिका के शादी हो गईल । आँख से आँशु गिरे लागल आ काँपत होठ से आवाज निकलल…
हम तोहके पा ना सकनी मुद्तो चहलो के बाद गैर पा गईल तोहके चंद रस्म निभवला के बाद” ।।

मोहन राधिका के बात उनकर बितावल साथ के साथे जिए लागले । आ आपना के बहुत दूर कर दिहले । मोहन के राधिका के रूप में आपन काम से प्यार हो गईल आ मोहन आपना के इगो कामयाब आ आदर्श प्रेमी/ बेटा बना लिहले त्याग बलिदान मर्यादा के बंधन में बांध के । कुछ बारिष बीतला के बाद …..

अचानक से एक दिन एगो सह कर्मचारी से कम्पनी में भेंट भईल जे राधिका के सहेली रहे आ मोहन के कंपनी में आज काम करे खतीर आईल रहे । मोहन अपना के रोक ना पावले आ पूछ देहले की राधिका कइसन बाड़ी प्रीति………। प्रीति राधिका के बच्चपन के सहेली रहली ।

इ का प्रीति के चेहरा मोहन के देखते लाल हो गईल बुझाईल की मोहन के जान ले लिहे । प्रीति के लाल लाल आँख से लागे की खून टपक जाइ । सँभाल अपना आप के अतना गुस्सा काहे का हो गईल मोहन कहले । बहुँत संझावला के बाद मामला शांत भईल ।

प्रीति कुछ बात करे के राजी ना होखस बाकिर बहुत नीहोरा कइला के बाद जावनं बात बतवली उ मोहन के ज़िन्दगी भर खतीर आँशु भरल रहे । प्रीति के जबान से राधिका बोलत्त रहली ……
तू बेवफा बाडा जब साथ ना देबे के रहे ता प्यार काहे कइला … काहे तू छोड़ के दूर हो गईला तहरा लगे हिम्मत ना रहे की तू भागा के सादी कर ला ?? … जेकरा खतीर रात रात भर जागत रहल ओकर के भुला के खुद चैन के नींद सूते लगलल … इ हे करे के रहे ता तहरा केहु आउर ना मिलल … तू हत्यारा बडा पापी बड़ा…. तानी शांत हो जा शांत मोहन कहले कइसे शांत रही कबो 5 शाल में जाने के कोशिश काहे ना कइला की उ कवना हाल में बाड़ी ….

तुंही उनकरा ज़िन्दगी में आइला ता उनकर माई बाबु ई हाल रह देहल ?????!!!!….
हमरो के कुछ कहे दा
देखा इ सच बा की हम उनकरा शादी के बाद बहुत दूर चल गइनी काहे की उनकर दुनिया/घर बस चुकल रहे । जवना के हमरा टुडे के कवनो अधिकार ना रहल । हम प्यार ता आज भी करीले बाकिर उनकर मन से आपन त्याग से उनकरा ख़ुशी से उनकरा समर्पण से …प्यार के मतलब एक दूसरा के पावले ना हा प्रेमी के ख़ुशी में आपन ख़ुशी देखल ही हमारा खतीर बड़हन हा प्रेम ..उनकर माई बाबु के ख़ुशी सायेद हमरा साथे सादी कइला में ना रहे … आ उनकर ख़ुशी ना रहे की उ हमरा साथै भाग के शादी करस … बस एही खुशी खतीर हम दूर हो गइनी ……

प्रीति इ बात सुन के जोर जोर से चीला 2 के रौवे लागली ……
ना ई एगो छोट फैसला हम्म्म्म हमरा राधिका के ऊपर पहाड़ बन गईल बा हो पहाड़ .. राधिका के माई बाबु बिना सोचले समझले केहु आउर पर विश्वास करी के । राधिका भी आँख बंद करी के विश्वाश कर लिहली जवना के नातीचा आज भोगत बाड़ी .. का बात बा बतावा ना साफ साफ बोला ..

जे राधिका के शादी करावल उ तहरा बारे में झूठ बोलल की तू नासा करे ला ! ताहार चाल चलल अच्छा ना हां ! तू कामाइबा ना ! न जाने का का …..
उ बहुत धोखा बाज निकलल जेकरा पर राधिका आ उनकर माई बाबु विशवास कइलस । धोखा से शादी करवा दीहलश.. जवन झूठ बोलले रहे तहरा बारे में उ सब गुन ओकरा में निकलल दारू बज गजेड़ी नसेड़ी सब गुन से भरल लईका मिलल …

उ मन के पुजारी ना तन के पुजारी निकलल आपन हवस के भूख मिटावला के बाद मारे भी लागल । उ कई बेर कोशिर भी काइली आपन माई बाबु के समझावे के आपन उपर बितल जुर्म के बतावे के .. बाकिर उनकर घर परिवार उनकरे के गलत साबित कर देव की तोरा मोहना के याद धइले बा उ कुछ साल ले बर्दाश काइली। जब माई बाबु के हकीकत मामूल चलल तब तक बहुँत देर हो गईल रहे । राधिका के उ माई बाबु के दिहल तोफा ही कुबूल रहे उ केहु आउर के साथै जाये के राजी ना भइली । जब ले जुर्म बर्दाश भईल काइली आपन एक दिन जीवन लीला समाप्त कर लेहली ….

मोहन इ हमरा आज ले ना समझ आइल की उ उनकर का रहे माई बाबु के ख़ुशी माई बाबु के कुल के इज़्तत आ आपन जीवन प्रेम के कुर्बानी ।।।।

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