भोजपुरी के बढ़िया वीडियो देखे खातिर आ हमनी के चैनल सब्सक्राइब करे खातिर क्लिक करीं।

गारी

0

” गारी ”

– प्राचीन काल से चलल आ रहल एगो अईसन परम्परा ह जवना के लोग हिसाब से जगहि देखि के मोका प प्रयोग करेला ।

– गारी प्राचीन काल से बिआ आ आगे जब ले सुरज आ चनरमा रहिये तब ले एकर प्रयोग होत रही ।

– अईसे त गारी गवाला , गारी दिअईबो करेला , गारी खियावल जाला , गारी सिखावल जाला , गारी सुनावल जाला , गारी गरियावल जाला ।

– केहु सवखे देला केहु दुखे देला केहु बात बात प गारी देला त केहु नापि जोखि के गारी देला कतना लोग खाति गारिये पारन ह त कतना लोग के खाना तब ले ना पचेला जब ले उ केहु के गरियाओ जनि , आ समधि लो त बिना गारी के खईबे ना करेला लो ।

– बाबुजी गरियवले त आसिरबाद भईल केहु दोसर गरियावल त सराप , बाबुजी के गरियावाला प बेटा डेरा जाला आ केहु अनका के गरियावला प मडर हो जाला ।

– केहु के सुधार देला त केहु के बिगाड देला , केहु सोझ हो जाला त केहु टेढ हो जाला , केहु सटहा लेखा होला त केहु बेहाया हो जाला ।

गारी के रुप- गारी कबो तीत त कबो मीठ होले , गारी कबो फुहर त कबो नीक होले । लोग गारी , लोगन के काम के परतोख ले के त कबो रिस्ता नाता के हिसाब से त कबो जाति के हिसाब से देला ।

गारी , मजबुर , असहाय , गरीब , अबर दुबर के हथियार ह त बेहाया बदमास लंठ दबंगन के श्रृंगार ह ।

गारी कबो कबो झगडा के शुरुवात ह त भोरभोरे बाबुजी के मुह से निकले वाला प्रवचन के सौगात ह ।

गारी मोका प नीमन से सरिहार के लागे वाला दिआउ त जेकरा खाति दिआला उ सोझ हो जाला बाकी खने खन गारी दिआउ त गारी देबे वाला के मुह खराब हो जाला ।

गारी सिखावेले, गारी रिगावेले , गारी पिनिकावेले ,गारी भडकावेले , गारी कबो नीमन त कबो बाउर कहाले ।

गारी रउवा खाति एगो बरिआर हथियार ह एकरा के हिसाब से मोका प निकाले के चाही ई बहुत मारक असरदार दवाई ह जवना मे देहि के बकियवा कवनो अंग काम ना करे एह काम मे खलिहा मुह आ जीभ चलेला , गारी करेजा से निकले त सामने वाला के करेजा चीर देले ।

एहि से गारी के सम्हारि के सरिहारी के जगहि आ बेरा देखि के देबे के चाही , काहे कि जे खने खने गरियावेला उ छुतिहर , बउचट , बम्मड , लतखोर आ बद कहाला ।

रउवा खातिर:
भोजपुरी मुहावरा आउर कहाउत
भोजपुरी शब्द के उल्टा अर्थ वाला शब्द
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : पहिलका दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : दुसरका दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : तिसरका दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : चउथा दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : पांचवा दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : छठवा दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : सातवा दिन
कइसे भोजपुरी सिखल जाव : आठवाँ दिन

ध्यान दीं: भोजपुरी कथा कहानी, कविता आ साहित्य पढ़े खातिर जोगीरा के फेसबुक पेज के लाइक करीं

पिछला लेखहमार भोजपुरी
अगिला लेखरही रही के जिअरा में लागे ला
टीम जोगीरा आपन भोजपुरी पाठक सब के ई वेबसाइट उपहार स्वरुप भेंट कर रहल बा। हमनी के इ कोशिश बा कि आपन पाठक सब के ढेर से ढेर भोजपुरी में सामग्री उपलब्ध करावल जाव। जोगीरा डॉट कॉम भोजपुरी के ऑनलाइन सबसे मजबूत टेहा में से एगो टेहा बा, एह पऽ भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के टटका ख़बर, भोजपुरी कथा कहानी, भोजपुरी किताब, भोजपुरी साहित्य आ भोजपुरी से जुड़ल समग्री उपलब्ध बा।

NO COMMENTS

आपन राय जरूर दींCancel reply

Exit mobile version