सरोज सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी तिपहिया दहेज

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परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, रउवा सब के सोझा बा सरोज सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी तिपहिया दहेज , पढ़ीं आ आपन राय जरूर दीं कि रउवा सरोज सिंह जी लिखल भोजपुरी कहानी ( Bhojpuri Kahani ) कइसन लागल आ रउवा सब से निहोरा बा कि एह कहानी के शेयर जरूर करी।

सांझुए से दुआर प क फेरा झाड़ू लाग गइल , आ लागो काहे ना। इहां के मझिला बेटा के सरकारी महकमा मे बड़हन पद मिलल ह , डंका बाजल ब्रह्म बाबा से काली माई के स्थान ले पुजा-पाठ भइल आ सगरो खुब मिठाई बंटाइल , छोटका भी बड़वा तरआला इसकूल मे जाला पढ़े त ना जा के मन फेंरवट करेला आ बड़का त एहदम हथलुफूल रहल ज्वार टाप ,मुधार भइला के बाद आन के जजात भी जान जाई कि इहनी के पपौती ह ।

भा कवनो समान केहू के दुआर प आ खेत खरिहानी मे गलती से छुट गइल उहो नजर बचाके कब्जा मे । गलत लत जवन ना करावे ना त पहिले के बड़का घर मझिला के छोड़के कुल्ह महाकाल के दरबार मे भर सींकम दम लगावेले स , महुआ तारकनाथ से बेजोड़ साथ- संगत धुंआ धुक्कड़ त आसमान ले उड़ाव स औघड़नाथ के भी अनघा आन्नद आवे । काहे कि मझिला के छोड़के सम्हरे घर भर भोला भगत रहल सरब गुन आगर हारम त हुरम , जीतम त थुरम सगरी गांव के अकेले घर पानी पियवले रहs स आ गांव भी टाहीए मे रहे , गोतीआ पट्टीदार त इहनी के अंइठलका देख के अगिआइल रहs स ।

सरोज सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी तिपहिया दहेज
सरोज सिंह जी के लिखल भोजपुरी कहानी तिपहिया दहेज

ताले ले उपर आला अरज सुन नु लिहले आ ” मोखालिफ के तारीफ का ” कुल्ह ममिला धुंआ – धुंआ हो गइल ।पिछला मझिला के पढ़त घड़ी बिआह तय तापर के बात भइल रहल रूपया पइसा कतना के ना जानल बाकिर दुचकिया के बात सबका सोझा दुआरभइल रहल ।

गरीब बेटीहा के दुचकिया सकान ना रहल ह तबो पढ़ल लिखल लइका जान के ना-ना क के त सकार लिहल ओही बिचे भगवती के कृपा से मझिला के नोकरी लाग गइल , नोकरी लागते इहनी के हवा मे .. जबान से पलटी एके पल मे… मार दिहले स बिआह करे खातिर एक से एक मालधनी आवे लगले कानाफूसी होखे लागल मझिला के तय-तापर बेटिहा पिछला साल क गइल बा तब काहे आन जगहा दुगो अधिका रूपिआ प आ चार चकिया ले वे प छान पगहा तुड़वले बाड़न जबान दिहला के कवनो भेलू नइखे । गाव के कवनो सज्जन खबर पेठवले कि आंई ना त

लइका बेहाथ हो जाई । दोसरा जगहा के भी बेटीहा लोग आके दू चक्का बढ़ाके चढ़ा उपिरी कइले बा । चर चकिया देवे प तइयार बा उहो पसन से जवन मन तवन।

अतना बात कान मे सुनते लइकी के बाप के गोड़ के नीचे से जमीन घसक गइल आ माथा से एड़ी ले पसेना से तर-तर चुए लागे लागल । एको क्षण बिना देर कइले परोसिया मे एगो समझदार पंडित जी रहस उहां के ले के बेचारू चल दिहले आ एकाध घंटा बाद बेटहा के दुआर प॔हुच गइले । पंडीत जी बेटहा के बारे मे छानबीन कइले त पता चलल कि लइकवा (मझिला के छोड़के )
कुल्ह लंगा हवे स ..

पंडीत के मन मे इ बात एक चक्कर घुम गइल लंगा से त गंगा डेराली हमनी त आदमी हई जा …. एहीजा परमेश्वर जी ही कवनो उकित बतइहे …. परमेश्वर जी के बनीहे , पंच मिल परमेश्वर बनीहे … गणमान्य लोगन के जूटान होखे लागल आ सगरी गांव -ज्वार बेटहा के गलत निति के विरोध मे ..बेटहा के दुआर प जमावड़ा लागल बा कि कसहूं बेटीहा
जवन पहिले तय बा ओही प बात कायम रहे , दु चकिया आ रूपिया पइसा ….

अस खेच्चरपाल बेटहा कि एकही रट चरचकिया ले के मानब जी अपना करेज के …. पंडीत जी बरियार अनुभव आला खेलाड़ी रहले आ बेटहा के घेर बान्ह करे के श्री गणेश क दिहले… बेटहा आ बेटीहा दुनो पक्ष के तनि अंइजा (उरेब) सहे के पड़ेला …. बिआह शादी के ममिला ह उपर – नीचे करे के पड़ेला …. आर डरेर त ह ना मेढ़ प खूंटा गाड़ दिही ऐने हमार ओने राउर…दूगो मन के मिलन ह , दूगो परिवार के संगे कतना नात – रिश्तेदार के मिलन ह …

ढेर छिछेलेदर जन करी सभे… अतना ना समझाके बुझाके पंडीत जी बरियार भूमिका बान्ह के बुद्धि वितरण क दिहनी कि… पंच परमेश्वर से ले के बेटहा – बेटीहा एक सुर मे पंडीत जी जवन कहम तवन मान लिहल जाई

पंडीत जी जवन कहम तवन मान लिहल जाई पहिले बेटहा से भगवान रउआ के खुब दिहले बाड़न , जान जाई कि सृष्टिकर्ता के साक्षात दर्शन आ सरकारी नोकरी पावल आज क समय मे एके बराबर बा।

एक चक्का के लोभ रउआ भी छोड़ी महाराज… सड़क प दु चक्कर सांझ-बिहान कवनो सवांग लगा दिही सौ-पचास बगली मे… तय करी तिपहिया दहेज अपना करेज के .. बेटीहा से बेटी बिआह खातीर जइसे एक कठ्ठा बेचाइल आधा कठ्ठा आउरो सही चिंता फिकीर भर जिनगी लागल रही एक चक्का रउआ बढ़ जाई बात आगा बढ़ो पंच परभेश्वर आ पंडीत के आशिर्वाद से बबुआ मझिला के बिआह तिपहिया प दुनो पक्ष के राजी खुशी से हो गइल।

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