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अमरेन्द्र जी के लिखल एगो हास्य व्यंग इयाद के बरिआत

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अमरेन्द्र जी

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अमरेन्द्र जी
अमरेन्द्र जी

रानी अनपढ़ होखला के बादो अंतिम साँस गिनत रही। राजा वैद, हकीम, डगदर, ओझा, गुनी, पीर,फकीर से कह दे ले रहलन कि जदि रानी मरलि त सभ जाना के खाल में निमक भरवा देबि।मरे के पहिले रानी,राजा से एगो बचन ले ले रही कि हमरा मरला के बाद हमरा इयाद में अइसन चीझु बने के चाहीं कि प्रजा हरमेस हमरा के इयाद करत रहो।राजा तुरते बाति मानि गइलन।आ एने छने भ में रानी के मुड़ी लुढ़ुकि गइल आने कि मरि गइलि।राजा के कवनो अकिल काम ना कइलसि।सभ कोरसिस बेकार हो गइल।बगल में दिअरखा प धइल दीया जइसहि बुझलि कि पले में बइठल कुकुरो रोवे लागल।चारो ओरे शोक छा गइलि।

श्राद्ध कर्म बीतला के बाद राजा अपना सभ मंत्री,सलाहकार आ नजदीकि लो के बइठक बोला के ई बाति जानल चहलन कि आखिर रानी के इयाद में का बनवावल जाव।जवना से कि उनुकर इयाद अमर रहो।सबसे पहिले राहि रहता के वजीर कहलन कि ए राजन ! राजधानी के सड़क के नाम रानी जी के नाम प क दिआव।पइसो कम खर्चा होई आ रानी जी चीर अमर हो जाइबि।
अगिला सलाह वजीर-ए-मकान के रहे कि महारानी के इयाद में एगो जनानी होस्टल बनवावल जाए।एही तरह से रामो’गति के बजीर,चक्कलस तहरीफ के वजीर,चिठ्ठी चपाती के वजीर आ अउरि सभ लोग आपन आपन बाति कहलन। जवना में काॅलेज,पार्क,हाॅस्टल,डाक टिकस जारी करे के सलाह सामने आईल।

अंत में ओह मंत्री के बारी आइल जवन राजा से जान- पहचान के कारन मंत्री बनल रहन। कहलनि कि महाराज!रानी राउर रहि आ रउआ से बहुत मोहब्बत करत रही।एह से रउओ आपन बिचार राखीं।राजा के मंत्री के ई सलाह पसन आइल।राजा कहलन कि मंत्री जी राउर कहल एकदम से जायेज बा।जब रानी हमार रहली ह त उनुका इयाद में का बनी आ का ना बनी ई आईडिया दोसर देउ ई तऽ हमरा खातिर शरम के बात बा।एकरा ला इतिहास कबो हमरा के माफ ना करी।

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राजा जनता जनार्दन के ओरे मुह कइ के कहलन कि रउआ लो के त मालूम बा रानी पानी में पंवरे के खूबि सवखीन रही।एह से उनुका इआद में एगो सुन्दर गड़हा खोनाई।आ साथे साथे सभ चिझु के निरमान होई जवन जवन रउआ सभे बतवले बानी।बाति राजा के रहे एह से कुछे दिनों में एगो तालाब (स्वीमिंग पूल), एगो जनाना काॅलेज,ऐगो जनाना हाॅस्टाल,पार्क,डाक टिकस आ
सड़क के नामकरन के काम पूरा
हो गईल।जनता एकर प्रयोग क के रानी के इयाद करे लगली।

एक दिन राजा अपना महल के छत प से ओह तालाब के ओरि देखत रहलन।एगो सुन्नरी जल-
क्रीड़ा में लीन रहे।राजा इनिका के देखि के पागल हो गइलन।अपना जासूसन से पूछववलन कि ई के ह? काफी खोजबीन के बाद ई मालूम भईल कि रानी के इयाद में बनल काॅलेज में पढ़े ली आ ओही हाॅस्टल में रहेली,जवन रानी के इयाद में बनल बा।अगिला सुबह राजा अपना सलाहकारन के
बइठक बोला के कहलन कि हम एगो सुंदरी के प्यार में पागल हो गईल बानी।बताईं जा हमरा का करे के चाहीं।

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केहू कहल कि अइसहिं प्रेम करत रहीं फिरू बिआह कर लेब।राजा कहलन कि का पता हमरा से प्यार करे ले कि ना करे ले?दोसर जना सलाह दिहलन कि अफवाह उड़ा दिहल जाई कि हुजूर से प्रेम करे ली।राजा के ई बात एकदमे पसन ना रहे कि प्यार के बदनाम कइल जाव।एगो बुजुर्ग सलाह दिहलन कि वसंत ऋतु आवते बा,रउआ आपन दिल के बात लिखि के कवनो हरकारा से भेज देब।आतना सुनते राजा भड़क गइलन आ बोललन कि अभी वसंत आवे में दु महिना बाकी बा आ एक-आध हप्ता में बड़ा दिन के छुट्टी में अपना घरे चलि जइहन तब का होई?

अंत में तइ भइल कि कि राजा तुरते प्रेम पत्र लिखके स्पीड पोस्ट करसु।लव लेटर तइयार भईल आ लिफाफा पर उहे टिकस सटाइल जवन रानी के इयाद में जारी भइल रहे।पाति मिलते जुवती चहके लागल आ पूरा काॅलेज में आ अपना सखी सहेली के बीच नामी हो गइल।अब महारानी के इयाद में बनल काॅलेज आ पोखरा के दिन-दिन भर चक्कर लगावे लागलि।आ राजा अब दिन-रात रानी के इयाद में बनल छात्रावास के आस पास फेरी लगावे लगन।

प्रेम गहिड़ होत गइल आ दुनो लो अब आगे के ओरि बढ़े लागल। अंत में उहो शुभ घड़ी आइए गईल।राजा के इयाद के बराति सज धज के ओही सड़क से निकलल जवना के नामकरन रानी के इयाद में कइल गईल रहे।

ओने रानी अमर भईली,आ ऐने प्रजा शादी के खुशी में विभोर हो के नयकी रानी के जय जयकार करत रहे।
आ एह तरे राजा आपन वचन पूरा कइलन।

अमरेन्द्र,आरा(बिहार)।

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