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पहीले लोग के बरात भी जात रहे

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पहीले लोग के बरात भी जात रहे,,
हमनी के बचपन मे भी बरात कोइ कोइ लोग हइल होई,,पर हम ज्यादा गंगा जी नहाए गइल बानी बैल गाड़ी से,बचपन मे स्कुल जात समय बैलगाड़ी भेटा जाव डर्ाइवर लोग बइठा लेस लोग, एह से पैदल चले से बच जाई,जेहदीन ना भेटास लोग ओहदीन पैदले चल के जाए परत रहे,,हम त पुरनका लोग से सुनले बानी बैल गाड़ी से बरात छपरा से िसवान 100 कीमी तीन दु दून लागत रहे जाए में,बीच मे खाय पीये के इंतजाम कोइ रीस्तेदार के घर मे कइल जात रहे,, चली बरात त घुम लेहनी अब आई बैल के बेरोजगारी पर,,,
टरेक्टर -जोताइ के काम ले लीहलस
थ्ेसर-दवनइ के काम ले लीहलस
बोरींग- ढेकीं ( इनार से पानी नीकालल जात रहे बैल के नाध के) खेत पटाई के काम ले लीहलस
टेम्पु- माल ढोआई सवारी के काम ले लीहलस
ट्ेक्टर- ढाआई,दवनइ,बुआई,जुताइ,यानी बैल के सारकाम ले लीहलस,,
अब आ जाई असल मुद्दा पर-
अगर ट्ेक्टर ना रहे त हर गाँव मे पाँच छे जोड़ा बैल मील जाई,लेकीन आज बैल के पैदा होए के साल लागे से पहीले बेच देतबानी हमनी के,,
सही मायने मे बैल के जान के दुश्मन ह
ट्ेकटर,एहसे अंग्ेज के या माँस खाए वाला के बहुत फायदा भइल बा,काहे की हमनी के बछ्छा के बचपने मे बेच के पीछा छोड़ा लेत बानी,आ उ बेचारा मर के राक्षस लोग के पेट के भोजन बन जात बा,,
गीँदृध जे पहीले हमनी के पास बहुत रहे,जहा पशु मरल देख के मेढरात रहे उहो आज खत्म हो गइल बा,काहे ओकर हीस्सा के भोजन राक्षस लोग खा रहल बा….सही मायने मे सबसे बड़ा जीम्ेदार हमनी के बनी,जउन हल के बीना हमवी के शादी ना होला उहके चलावे वाला के आज नामो िनशान ना बा,,
कलयुग इहे त बा बस हमनी से समझे के फेर बा, जउन हल के चलते हू खेत मे सोना उपजे लागत रहे,आज उ खेत दीन पर दीन उसर(बंजर) भइल जा रहल बा,,इ रउआ आपन खेत के भी देख सकीले……

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