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कोरोना संक्रमण से बचाव ही उपाय | तारकेश्वर राय

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कोरोना संक्रमण से बचाव ही उपाय | तारकेश्वर राय

परनाम ! स्वागत बा राउर जोगीरा डॉट कॉम प, आज रउवा के सामने बा तारकेश्वर राय जी के लिखल आलेख कोरोना संक्रमण से बचाव ही उपाय पढ़ीं सभे आ शेयर करीं।

आज चीन पूरा दुनियाँ में तहलका मचवले बा खाली आपन उत्पादन क्षमता आ उत्पाद से ना बल्कि कोरोना जइसन महामारी के कारण भी । नाम बड़े आ दर्शन छोटे वाली कहावत के चरितार्थ करत नावें खाली चीन ह चीनी जइसन मिठास से कवनो दुरो के हितइ नतइ भा भर भवद्दी नइखे एकर । भले एकर आँख ना खुलत होखे लेकिन आज इ पूरा दुनियाँ के आँख खोल देले बा । आज नाम सुनते मन में कड़वाहट घुल जाता । कभी अंतरिक्ष में कचरा, कभी हथियार, कभी सीमा के तोड़ के घुसपैठ आ कबो यू एन वो में आतंक के मलिकार लोग के पक्ष में वीटो पावर के प्रयोग एहिजा तक त ठीक रहल ह लेकिन कोरोना वायरस के उतपत्ति चाहे कवनो कारण से भइल एकरा से अब पूरा विश्व के खौफ के साया में जिए खातिर मजबूर क देले बा इ चीन । कोरोना नाम के वायरस भले ओकर नियत के कोख से जनमल प्रकृति के बिरुद्ध जा के मांसाहारी भोजन के चलते होखे अब इ आदमी से आदमी के सम्पर्क के चलते चलते धीरे धीरे पूरा बिश्व परिवार के अपना चपेट में ले रहल बा ।

कोरोना संक्रमण से बचाव ही उपाय | तारकेश्वर राय
कोरोना संक्रमण से बचाव ही उपाय | तारकेश्वर राय

जब वायरस पेट्रोल के आगी नियन फ़इले लागल चट मरीज पट मौत के परिपाटी चल निकल त मजबूर हो के नव दिन में ही एक हजार मरीज के इलाज़ करे वाला अस्पताल बना दिहलस, एतना दिन में त हमनीके देश में कागज़ पर नक्शा तक बन जाव उहे ढेर बा ।आ इहे ना १४०० डॉक्टर के बेवस्था भी कई लिहलस । खाली नौ दिन में ? १४०० नाम के टाइप करे में ही नौ दिन के समय सिमा ख़त्म हो जाई हमनीके इहाँ । हमनीके इहाँ सीमेंट में रेत मिलावल जाला उ तकनीक में जरूर काम के जूनून आ जिद्द के मिलवले होखी तब इ काभइल । नौ दिन में अस्पताल बन जाव इ अचरजे के बात बा हमनीके देश में त नौ दिन छोड़ी नौ साल में भी अस्पताल बन जाव त किसमते जानी आ उद्घाटन आ काम शुरू क दे अस्पताल त सस्टांग दंडवत के अधिकारी बा । बनते बनत सरकार बदल जाला निति बदल जाला । लेकिन काम करे के गति आ गुणवत्ता में कवनो बदलाव नहींए आवेला ।

हमनीके देश में त सौ दिन त का काम करे के बा ? इहे प्लानिंग में निकली जाला एकरा बाद समय लागेला इ फाइनल करे में केकरा के टेंडर देवे के बा ? कइसे देवे के बा ? केकरा से केतना प्रतिशत कमीशन लेवे के बा ? लाख कोरोना वायरस खतरनाक होखे लेकिन भले एकरा से दुनियाँ तबाह परेशान होखे देश के प्रधानमंत्री से लेके कुल्हिये हुकुमरान लोग के आवेदन शायदे हमनीके कुल्हिये आदमी के प्रेरित कर पावे में सफल लउकत बा । बिकट इस्थिति के अहसास भी नइखे हमनीके अधिकतर आदमी के । अनपढ़ लिख लोढ़ा पत्थर के बात हम नइखी करत पढ़ल लिखल समझदार लोग भी एकरा के सीरियस नइखे लेत इ दुखद बा । उ मस्त बा आपन गलतफहमी के दुनियाँ में ।

कोरोना संक्रमण से बचाव ही उपाय

सावधानी ही उपाय बा एह खतरनाक बीमारी से निजात पावे खातिर । इलाज त अब तक नइखे मिल पावल । लागल बा सभे कोशीस जारी बा । कोरोना त बहुते स्वाभिमानी और आत्मसम्मान से लवरेज वायरस के रूप में कमे दिन में ख्याति अर्जित क लेले बा । उ तब तक राउर घरे झकहुं ना आई जबले रउवा ओके बहरी से आपन देह पर उठा के ना ले आई । रउवा सबे से निहोरा बा रवुआ अगर खूब जरूरी ना होखे त घर से बाहर निकलला से परहेज करी आ अनचाहा पाहुन के अपना घरे मत बोलाई । रउवा जवान बानी रउवा अंदर हो सकता क्षमता होखे एह वायरस से लड़े के लेकिन रवुआ के ख़ुशी में चार चाँद लगावेला राउर परिजन जेमा बुजुर्ग उम्रदराज पीढ़ी बा बाल बुतरू बा हो सकता उ लोग एतना मजबूत ना होखे । उनकरा खातिर सावधानी साफ़ सफाई के धेयान राखल जरूरी बा । मत सट दूर हट के मूल मंत्र अपना जीवन में उतरला के काम बा । डरी मत डेरवाई मत लक्षण दीखते खुदे डॉक्टरी करे से बाँचल जाई त हमनीके सुरक्षित रहल जाई । खाली समय के उपयोग करी पढ़ी पढ़ाई गाई बजाई खाई पिहिं जांगर ठेठाई आपन शौक के कवनो काम करी । समय के त एही खासियत ह कतनो बुरा बा निक होखे एक दिन बीती जाला । इ अन्हरिया भी बीती जाई ख़ुशी के किरिन जरूर फूटी बिसवाश राखी ।

डॉक्टर सुरक्षा में लागल सुरक्षा बल स्वास्थ्य सेवा में लागल नागरिक अउरी जरूरी सेवा में लागल कर्मी, सफाई कर्मी सभकर एके कहनाम बा “हमनीके रवुआ सभे खातिर अपना काम प साँच मन से लागल बानी जा रवुआ सभे घरे रहीं जा हमनी खातिर” ।

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