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खेतवा घुमा दी | भोजपुरी कविता | संजीव कुमार सिंह

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खेतवा घुमा दी | भोजपुरी कविता

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भइसिया पे होजा सवार,
गोरी तोहे खेतवा घुमा दी ।

गउआ जवरिया बहे पुरवइयाँ
पिपरा के पतवा,लगावे नजरिया
भइसिया पे होजा सवार
गोरी तोहे खेतवा घुमा दी ।

खेतवा घुमा दी | भोजपुरी कविता
खेतवा घुमा दी | भोजपुरी कविता

चम्पा चमेली महकावे डगरिया
दुभवा आ घसिया, बनल बा मखमलिया
भइसिया पे होजा सवार
गोरी तोहे खेतवा घुमा दी।

झूमे मकईया गावेले चिरइया
रुन झुन बजावेले, नदियां के पनिया
भइसिया पे होजा सवार
गोरी तोहे खेतवा घुमा दी।

नवकी दुलहिनिया बचावे नजरिया
छुप छुप काटेली, धनवा के बलियां
भइसिया पे होजा सवार
गोरी तोहे खेतवा घुमा दी।

बैलन के जोड़ियां बजावे संगीतवा
खेतवा में झुमि झुमि, गावे किसनवा
भइसिया पे होजा सवार
गोरी तोहे खेतवा घुमा दी।

खेतवा में गाड़ी के बसवा के पाटी
खलीहनवा में लागल बा अनवा के थाती
भइसिया पे होजा सवार
गोरी तोहे खेतवा घुमा दी।

संजीव कुमार जी

गांव से गोरिया चलेली बजारे
खेतवा पगडंडिया के सोहरत निहारे
भइसिया पे होजा सवार
गोरी तोहे खेतवा घुमा दी।

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