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टूटत बा बिश्वास के धग्गा

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टूटत बा बिश्वास के धग्गा, बहुते जल्दी टूटत बा.
गैर लोगवा आपन होता, आपन लोगवा छूटत बा.

जरत बा रिश्ता के दिया अब मतलब का तेल से,
गरज न होखे पूरा त लोग बात-बात में रुठतबा.

घर के बात बतावल जाता दोसरा गावं के लोगसे,
तीसरा क चक्कर में पड़ के दोसरा के घर फूटत बा.

मत पूछी त बढ़िया होई, अब हमदर्दी के बात जी,
शादी अउर सराधे में अब हित नात भी जुटत बा.

केतना घर के चूल्हा चौका बिना जरले सूत जाला.,
कही पे लोगवा भोग-बिलास में लाखों रुपया छिटत बा.

कहे के लोग त आपन बा पर मन सेबा पराया जी ,
एह कलयुग में बाप के हाथे, बेटी के इज्जत लूटत बा.

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