भोजपुरी साहित्य

भोजपुरी साहित्य, भोजपुरी कविता, भोजपुरी कथा कहानी, भोजपुरी ग़ज़ल, Bhojpuri sahitya, Bhojpuri kavita, Bhojpuri katha kahani, Bhojpuri gazal

ई शहर

0
का भईल जे सुने के खरी-खोटी देला सहरवे हs जे पेट के रोजी-रोटी देला जाके मिल में, तू लाख बुनs कपड़ा ढके खातिर देह, खाली...
नबीन कुमार 'भोजपुरिया'

भिखारी ठाकूर के मुडि प छत काहे नईखे हो ?

0
दुकानदार - जब बात कई के खलिहा बतियाई के झारखंड कश्मीर महाराष्ट्र पंजाब आ कवनो देश राज्य जीतल जा सकेला त फेरु काम करे...
ज़ौहर शाफ़ियाबादी

होला कबो बहार त पतझड़ जमीन पर

1
होला कबो बहार त पतझड़ जमीन पर लीला ई रोज देखेला अँखिगर जमीन पर अँखिया में अँखिया डार के कहलें ऊ अनकहल नेहिया के फूल खिल गइल...
अनिमेष कुमार वर्मा

ढेर दिन हो गइल

1
ढेर दिन हो गइल बिना एलार्म के नींद खोलाइल सबेरे उठ के दुअरा बइठ के चाह पिअल, अखबार पढ़ाईल ढेर दिन हो गइल, बिना बतावले केहु के, घरे जाईल बिना...
प्रभास मिश्र

मंदिर मे दुसाध

0
ए धनेसरी , तनी ते अपना सोड़वा (सरफ) में से दे त। देख ना चार -पांच हाली त खूबे रगड़-रगड़ के फींच लेनी बाकिर...
देवेन्द्र नाथ तिवारी

सेमर के फूल

0
एगो छोट बच्ची के दुआरे प एगो सेमर के विशाल गाछ रहे. ओह घरी इहे बसंत के महिना चलत रहे. सेमर के फूल दिन...
धनंजय तिवारी जी

भिखारी ठाकुर से परिचय

0
हमनी के बचपन में मनोरंजन के मुख्य जरिया ड्रामा ही रहे, केहु के बारात होखे या कवनो और फंक्शन, रात में ड्रामा के मंचन...
श्वेताभ रंजन

काहे ना रोज मनावल जाव: भोजपुरी गीत

0
काहे ना रोज मनावल जाव भोजपुरी गीत गावल जाव हर दिन उत्सव हर पल उल्लास काहे ना रोज मनावल जाव भोजपुरी गीत गावल जाव अँगुरी पकर के खेत तर बचपन के...

हमनी के हरामज़ादा हईं जा

0
पुरखन के किरिया खाके कहतानी- कि हमनी के हरामज़ादा हईं जा आर्य, शक, हूण, मंगोल, मुगल, द्रविड़ आदिवासी, गिरिजन, सुर आ असुर ना जाने कवना...
सुधीर पाण्डेय

दूभ

0
पूस मे ओस की बूंदों से लदफद , पूनम से नहा , केस सुखाने को | निहारती घने कोहरे मे , एकटक , नभ मे दिखते ,...
सुधीर पाण्डेय

आन्हर

0
अपना मर्जी से , खुश होके , सुविधा से , सगरों अत्याचार देखल , बिना दुबिधा के | चऊक पर के चरचा , पंचायती सुनल , निमन...
सुधीर प्रियरंजन

भोजपुरी साहित्य में हास्य-व्यंग्य

0
नूनों आ मरिचा के साथे खाके पेट भरल जा सकऽता आ छतीसो व्यंजन आ छपनों परकारो के साथे। बाकिर नून-मरिचा के साथे खाके खाली...

तिरिया-चरित्तर

1
तिरिया-चरित्तर की बारे में तS बहुत सुनले होखबी सभे। आईं सभे हमहुँ रउआँ सब के एगो कथा सुना दे तानी। एगो गाँव में बुधु नाव...
सत्येन्द्र शुभम

जाड़ के मजा

0
जाड़ के मजा जाड़ा के दिन त गरीब खातिर जान लेवा होला लेकिन एह मौसम के एगो अलगे आनन्द भी होला | चारो ओर...
अजीत कुमार तिवारी

चहेटना चलल ससुरारी भाग – १

0
एक बार भईयवा हमार( सगा त केहु नईखे बाकि केहु भी ए जगहा पर अपना के हमार भाई समझ सकेला) ससुरारी चलल, माघ...

शनिचर

0
लडिकाईं में हम गाँव के सरकारी स्कूल में पढ़े जात रहनी । बोरा बिछा के पढ़े के आ खजूर के छेँवकी से पिटाये के...
मलिकाईन आईल बाड़ी

मलिकाईन आईल बाड़ी

0
दिन भर महभारत बांचेली ! हमरी कपार पर नांचेली ! अपनी मांगन पर अड़ जाली ! जे मना करी हम लड़ जाली ! कहें हमसे कि जीन्स ले...

गरीबी

0
बाबु के लागल बुखार मितवा। मिले ना दवाई उधार मितवा। काढ़ा बनाइले बाबु के पिआइले। होखे ना तनिको सुधार मितवा। डाक्टर सरकारी चलावे आपन क्लिनिक लेके पगार मितवा। बाबु...
कामेश्वर भारती

धरम

0
आगे खाई पिछे खाई संकट में बा जियरा मितवा। संकट में बा जियरा मितवा। साधु संत चोर हो गइले, धरम भइले बहिरा मितवा। संकट में बा जियरा मितवा। योगि जोगि...
प्रभास मिश्र

मनवा कईसे लागी

1
ललना गईले ममहरवा मनवा कईसे लागी हो ..२ भोरे से राती ले रहले ऊहो आंखि के सोझा एको पहरा छोड़नी नाहीं बिनका उनके लेहले कोरा ललना गईले ममहरवा मनवा कईसे लागी...