मर के भी भोजपुरी माई हम चुकाई तहार इ एहसान
माटी के क़र्ज़ बा हम मर के भी चुकायेब
तोरा के माटी क देब चाहे हमही माटी हो जायेब
कहत बानी उ हम करके...
जिन्गी तराजु हऊवे
जिन्गी तराजु हऊवे, सुख दुःख जोखेला।
सुखवेके जेतना प्यार, एके दुखवोसे होखेला।
कबहु एने कबहु वोने पलडा झुले।
कबहु लागे बन्धु डण्डीयाँके तुरे।।
हँसीके फुही फाही ,गमके सागर...
एक रूपया के कहानी
रउवा शॉपपिंग काम्प्लेक्स भा मॉल मे जाते होखेब कुछ ना कुछ बाजार करे, कई बेर अइसन होला की खुचरा ना रहला पर आदमी एक...
अबे ले माई के लगे रहेनी
दूगो लंगोटिया इयार ढेर दिन बाद एक दूसरा से मिलल लोग, बाते बात में एगो दोस्त दोसरासे बस जाने खातिर पुछले
"का इयार तहरा...
अकबर बीरबल के कहानी
सम्राट अक़बर के दरबार मे नवरतन मे से एगो बीरबल भी रहले, बीरबल बहुत बुद्धिमान रहले। एक दिन अकबर सोचले की आज भरल...
वाह! रे चिरईयाँ
वाह! रे चिरईयाँ तोहर,कईन नसीब बा?।
उडी चली जाए उहवे,जहवासे प्रित बा।।....१
रोजे रोजे खोता बदले,रोजे रोजे ठाव हो।।
राखे जमिनियाँ पर, कभी कभार पाव हो।
बनावे ठेगाना...
माई के अंचरा मे
लुकाके देख अंचरामे, माई के बबुवाँ पजरामे।
मिलेला सकून केतना, माई के बोली डटलामे।।
माईके ममता का जानी, जे बोतलके दुध पियले बा।
बिना माईके छत्रछाँव मे,...
नइहर छूटलऽ जात रे
नइहर छूटलऽ जात रे!
काँहें एतना सनेह सुगना
नइहर छूटलऽ जात रे!
ना केवनो चिन्ह बाँचीऽ
नाही पहचान रे!
दुआर रसता सब
बनी जाई अन्जान रे!
नइहर छूटलऽ जात रे!
दिन दुपहरी
नाहीं...
भोजपुरी गजल
उ काठ के करेजा बरबस छलक पड़ल,
टूटल रहे सिन्होरा ,मिटल रहे भरम ।
पपनी के लोर में रहे ,उलझल जे मन के नाव,
पतवार के उमंग...
केंवार बंद करके
केंवार बंद करके
सब केहु राखेला
ना केहु आओ, ना अपने जाएके
कबो कुछ भईल
त खाली मोका में
मुड़ी निकाल झाकेला
जईसे एगो पीसाच बा बईठल
हाँथे लेहले...
पीके (PK)
एह सिनेमा के बारे मे हम पिछिला एक साल से सुनत आ पढत बानी , कबो आमिर खान भोजपुरी बोलिहे त कबो भोजपुरी...
हवा दुनू चली बाबा
मोहब्बत आ नफरत के हवा दुनू चली बाबा
तब नू ओह गली में दाल हमनी के गली बाबा
उ तहरा के मुआई फेर हमरो जान ली...
ना चाही हमरा ई पैकेज | भोजपुरी कहानी | चन्दन कुमार सिंह
ई पिछले साल के बात ह, हमहुँ दिळी से दिवाली आ छठ पूजा तक के छुटी लेके घरे पहुँचल रहनी, बड़ा बढ़िया लागत रहे...
का लाल : भोजपुरी कविता
नागार्जुन के मैथिली कविता की लाल? की लाल? के भोजपुरी अनुवाद
का लाल? का लाल?
अड़हूल के फुल लाल !
आरती के पात लाल !
तिरकोल के फल...
खोल
खोल, बाह्य आवरण के कहल जाला । ई प्राकृतिक आ कृत्रिम दुनो प्रकार के होला , जइसे- घोंघा के खोल, रजाई-तकिया के खोल आदि...
मन काँव-काँव करके बोलावेला
काल आँगन के कोन से उ बोलवत रहे
काँव-काँव करके आवाज़ लगावत रहे
सर्दी के काली रात से सूरज निकल के
ओस के समंदर...
भिखारी ठाकुर के बिरहिन
दुनिया के लगभग सब भाषा के साहित्य अपना अँकवारी में विरह , दर्द ,आह के समेटले बा । इहे ना अलग अलग भाषा के...
भिखारी ठाकुर के सामाजिक कुरीतियन पर चोट
भिखारी ठाकुर के सामाजिक कुरीतियन पर चोट
कवनो जनरीति के जब सामाजिक मान्यता मिला जाला त उ रूढ़ी बन जाले । जब पीढी दर...
परदेसिया
परदेसिया
“ट्रेन के का पोजीशन बा” बलराम व्यग्रता से पूछले.
“बाबूजी ट्रेन त एक घंटा लेट बिया.” बलराम के बेटा रमेश जबाब देहले.
“एहिजा एक घंटा लेट...
सीवान के बुढ़िया माई
सीवान के बुढ़िया माई - सबकर मनोकामना पूरन करे वाली माई
सीवान के ऐतिहासिक गांधी मैदान के उत्तर-पुरुब की ओर जाये वाला रास्ता में स्थापित...
















